
वेदांता पावर प्लांट हादसा, शुरुआती जांच में लापरवाही उजागर: एक घंटे में दोगुना लोड, फर्नेस बना ‘बम’, 20 मजदूरों की मौत, अनबर्न फ्यूल और सिस्टम फेलियर से 1-2 सेकंड में हुआ भीषण विस्फोट
सक्ती जिले के वेदांता पावर प्लांट में मंगलवार दोपहर हुए भीषण बॉयलर विस्फोट की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में गंभीर लापरवाही सामने आई है। जांच के मुताबिक यह महज एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं, बल्कि उत्पादन बढ़ाने की जल्दबाजी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी का परिणाम था। महज एक घंटे के भीतर उत्पादन क्षमता को लगभग दोगुना करने की कोशिश ने प्लांट के फर्नेस को ‘बम’ में बदल दिया, जिसकी कीमत 20 मजदूरों को जान गंवाकर चुकानी पड़ी, जबकि 16 अन्य घायल हुए हैं।

औद्योगिक सुरक्षा विभाग के बायलर इंस्पेक्टर उज्जवल गुप्ता और उनकी टीम ने बुधवार को करीब 6 घंटे तक घटनास्थल की जांच की। इसके बाद शाम 8 बजे रिपोर्ट एसपी प्रफुल्ल ठाकुर को सौंपी गई। रिपोर्ट के आधार पर अब एफआईआर दर्ज की जाएगी, जबकि कलेक्टर अमृत विकास टोपनो ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं।
2.33 बजे हुआ विस्फोट, 1-2 सेकंड में बढ़ा खतरनाक दबाव
जांच रिपोर्ट के अनुसार, हादसा 14 अप्रैल को दोपहर 2:33 बजे हुआ। उस समय 2028 टीपीएच क्षमता वाले विशाल वाटर ट्यूब बॉयलर में अचानक फर्नेस प्रेशर (भट्ठी का दबाव) तेजी से बढ़ गया।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह प्रेशराइजेशन महज 1 से 2 सेकंड के भीतर हुआ, जिससे सिस्टम को बंद करना या किसी तकनीकी फेलियर को रोकना संभव नहीं था। दबाव इतना अधिक था कि अंदरूनी विस्फोट हुआ और इसकी चपेट में बाहरी पाइपलाइन भी आ गई।
एक घंटे में 350 से 590 मेगावाट तक बढ़ाया लोड
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हादसे से पहले प्लांट में उत्पादन बढ़ाने के लिए बॉयलर का लोड तेजी से बढ़ाया गया। लोड 350 मेगावाट से बढ़ाकर लगभग 590 मेगावाट किया गया। यह वृद्धि बेहद कम समय (करीब एक घंटे) में की गई। इतनी तेजी से लोड बढ़ाने के लिए ईंधन और हवा का अत्यंत सटीक संतुलन जरूरी था, जो नहीं रखा गया। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि उत्पादन बढ़ाने की इस जल्दबाजी ने पूरे सिस्टम को अस्थिर कर दिया।

पीए फैन में बार-बार खराबी, बिगड़ा हवा-ईंधन संतुलन
रिपोर्ट में तकनीकी खामियों का भी खुलासा हुआ है। पीए (प्राइमरी एयर) फैन में 3-4 घंटे के भीतर तीन बार खराबी आई। सुबह करीब 10:30 बजे ही लॉगबुक में खराबी की चेतावनी दर्ज की गई थी। इसके बावजूद ऑपरेशन जारी रखा गया। पीए फैन की खराबी के कारण फर्नेस में हवा और ईंधन का संतुलन बिगड़ गया, जिससे अधजला ईंधन (अनबर्न फ्यूल) जमा होने लगा। यही आगे चलकर विस्फोट का मुख्य कारण बना।

अनबर्न फ्यूल से बना प्रेशर, फटे पाइप
विशेषज्ञों के अनुसार, फर्नेस में जमा अनबर्न फ्यूल ने अचानक दहन के दौरान अत्यधिक दबाव पैदा किया। इस दबाव से बॉटम रिंग हेडर के कनेक्टिंग पाइप फट गए। पाइप फटना मुख्य कारण नहीं, बल्कि द्वितीयक परिणाम था। असली वजह असंतुलित दहन और अचानक दबाव वृद्धि रही।
संभावित सिस्टम फेल्योर ने बढ़ाई तबाही
जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि अत्यधिक दबाव के कारण पाइपिंग सिस्टम या अन्य तकनीकी हिस्सों में फेल्योर हुआ। सेफ्टी मैकेनिज्म समय पर काम नहीं कर पाया। बैकअप सिस्टम भी प्रभावी नहीं रहा।

बड़े सवाल: जिनका जवाब अभी बाकी
- जब सुबह ही सिस्टम में खराबी के संकेत मिल गए थे, तो ऑपरेशन रोका क्यों नहीं गया?
- क्या अधिक उत्पादन और मुनाफे के दबाव में सुरक्षा से समझौता किया गया?
- पीए फैन की खराबी के बावजूद बैकअप सिस्टम क्यों फेल रहा?
- क्या सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन जानबूझकर नजरअंदाज किया गया?
मुआवजे की घोषणा
हादसे के बाद कंपनी प्रबंधन और सरकार ने सहायता की घोषणा की है। कंपनी पाबंधन ने मृतकों के परिजनों को 35 लाख रुपए और एक सदस्य को नौकरी, घायलों को 15 लाख रुपए देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री राहत से मृतकों को 5 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए देने की घोषणा की गई है। वही प्रधानमंत्री राहत कोष से मृतकों को 2 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए देने की घोषणा की गई है।

कांग्रेस ने बनाई 10 सदस्यीय जांच समिति
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इस घटना की जांच के लिए 10 सदस्यीय टीम गठित की है। इसका नेतृत्व पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल करेंगे। इस टीम मे पूर्व मंत्री नोबेल कुमार वर्मा, खरसिया विधायक उमेश पटेल, चंद्रपुर विधायक रामकुमार यादव, कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव, जैजैपुर विधायक बालेश्वर साहू, अकलतरा विधायक राघवेंद्र सिंह, जांजगीर चांपा विधायक व्यास कश्यप, पामगढ़ विधायक शेषराज हरवंश, सक्ती जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष रश्मि गबेल, जांजगीर चांपा जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष राजेश अग्रवाल सदस्य है। यह समिति घटनास्थल का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट देगी।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी का नतीजा
प्रारंभिक जांच साफ तौर पर संकेत देती है कि यह हादसा अचानक नहीं हुआ, बल्कि लगातार मिल रहे चेतावनी संकेतों की अनदेखी और उत्पादन बढ़ाने की जल्दबाजी का नतीजा था। तकनीकी गड़बड़ियों, खराब निगरानी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी ने मिलकर एक ऐसी स्थिति पैदा की, जिसने कुछ ही सेकंड में पूरे सिस्टम को तबाह कर दिया।