
सक्ती में RTI को लेकर विवाद गहराया: समय सीमा के बाद 8,070 रुपये शुल्क मांगने पर मामला द्वितीय अपील की ओर
सक्ती जिले के मालखरौदा विकासखंड अंतर्गत शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अड़भार में सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई जानकारी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पत्रकार एवं आरटीआई कार्यकर्ता भगतराम शर्मा द्वारा प्राचार्य ए.के. सिंह के कार्यकाल से संबंधित विभिन्न वित्तीय अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां मांगी गई थीं, लेकिन निर्धारित 30 दिनों की समय सीमा में सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई।
आवेदक ने 3 दिसंबर 2025 को स्पीड पोस्ट के माध्यम से आवेदन प्रस्तुत करते हुए ए.एफ., स्थानीय परीक्षा, विज्ञान, क्रीड़ा, स्काउट, रेडक्रॉस, आरएमएसए तथा पीएफएमएस मद से संबंधित लेजर पंजी, कैशबुक, व्हाउचर, स्टाफ पंजी, कोटेशन और तुलनात्मक चार्ट की सत्यापित प्रतियां मांगी थीं। आवेदन के साथ 10 रुपये का पोस्टल ऑर्डर भी संलग्न किया गया था।

आरोप है कि जन सूचना अधिकारी द्वारा नियत समय सीमा मे कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद 2 जनवरी 2026 को जारी पत्र, जिसे 8 जनवरी 2026 को डाक में बुक किया गया, में 4035 पृष्ठों की जानकारी बताते हुए 2 रुपये प्रति पृष्ठ की दर से कुल 8,070 रुपये जमा करने का निर्देश दिया गया। आवेदक का कहना है कि पत्र समय सीमा समाप्त होने के बाद प्रेषित किया गया, जिससे सूचना निशुल्क उपलब्ध कराने की बाध्यता से बचने का प्रयास किया गया।
मामले में प्रथम अपील जिला शिक्षा अधिकारी सक्ती के समक्ष दायर की गई। 9 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई में अपीलार्थी और जन सूचना अधिकारी दोनों उपस्थित रहे, लेकिन जानकारी निशुल्क उपलब्ध नहीं कराई गई। प्रथम अपीलीय अधिकारी ने आदेश मे उल्लेख किया कि अपीलार्थी चाहें तो छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील प्रस्तुत कर सकते हैं।

आवेदक ने यह भी आरोप लगाया है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पदस्थ एक कथित दलाल द्वारा आरटीआई प्रकरण मे लेन-देन कर समझौते का दबाव बनाया जा रहा था। आवेदक का दावा है कि उसके पास संबंधित व्यक्ति के फोन कॉल की रिकॉर्डिंग भी मौजूद है, जिसमें समझौते के लिए बार-बार संपर्क किया गया।
अब यह प्रकरण द्वितीय अपील की ओर बढ़ रहा है। आवेदक ने कहा है कि समयावधि में सूचना न देना सूचना का अधिकार अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन है और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए। मामले को लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है तथा आगे की कार्रवाई राज्य सूचना आयोग में होने की संभावना है।