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वेदांता पावर प्लांट हादसे में नया मोड़: अब तक 23 लोगों की मौत, बाकी का इलाज जारी, ऑपरेशन-मेंटेनेंस में बड़ी लापरवाही उजागर, NGSL की भूमिका जांच के घेरे में

सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट मामले में अब जांच का दायरा केवल हादसे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश की दो बड़ी कंपनियों से जुड़े ऑपरेशन फेलियर की ओर भी इशारा कर रहा है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्लांट के ऑपरेशन और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी संभाल रही एनटीपीसी जीई पावर सर्विस लिमिटेड (एनजीएसएल) की भूमिका अब जांच के केंद्र में है।

बताया जा रहा है कि एनजीएसएल, एनटीपीसी और जीई पावर इंडिया लिमिटेड का संयुक्त उपक्रम है, जिसमें दोनों की 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी है। एनटीपीसी देश की सबसे बड़ी सरकारी बिजली उत्पादक कंपनी है, जबकि जीई पावर इंडिया निजी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी है, जो 1999 से पावर सेक्टर में सक्रिय है। इसके बावजूद 600 मेगावॉट क्षमता वाली यूनिट का सुरक्षित संचालन सुनिश्चित नहीं हो सका, जिससे यह बड़ा हादसा हुआ।

जांच का फोकस ऑपरेशन और सुरक्षा प्रक्रियाओं पर

हादसा सिंघीतराई प्लांट के बॉयलर यूनिट-1 में हुआ, जिसका संचालन स्टेशन हेड राजेश सक्सेना के अधीन था। मजिस्ट्रियल जांच में अब यह प्रमुख सवाल उठाया जा रहा है कि क्या बॉयलर का प्रेशर बढ़ने के बावजूद सुरक्षा अलार्म को नजरअंदाज किया गया था। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि क्या निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का पालन किया गया या नहीं।

इस पूरे मामले की जांच सक्ती कलेक्टर अमृत विकास तोपनो और एसपी प्रफुल्ल ठाकुर के नेतृत्व में की जा रही है। जिला प्रशासन ने दस्तावेजों की गहन स्क्रूटनी शुरू कर दी है और केंद्रीय टीम को भी जांच में शामिल किया गया है, जिससे तकनीकी पहलुओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।

जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका जांच के घेरे में

सिंघीतराई प्रोजेक्ट में एनजीएसएल की टीम तैनात है, जिसमें प्रोजेक्ट हेड व साइट इंचार्ज के रूप में राजेश सक्सेना कार्यरत हैं। वे वरिष्ठ महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी हैं और वेदांता प्रबंधन तथा एनजीएसएल कॉर्पोरेट ऑफिस के बीच समन्वय की मुख्य कड़ी माने जाते हैं। यूनिट-1 के दैनिक संचालन की जिम्मेदारी भी उन्हीं के पास थी।

इसके अलावा मेंटेनेंस टीम बॉयलर, टरबाइन और अन्य सहायक उपकरणों के रखरखाव के लिए जिम्मेदार थी। ऐसे में ऑपरेशन और मेंटेनेंस से जुड़े सभी अधिकारियों की भूमिका की बारीकी से जांच की जा रही है।

सुरक्षा और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी भी एनजीएसएल के पास

जानकारी के अनुसार, वेदांता द्वारा वर्ष 2022 में प्लांट अधिग्रहित करने के बाद पिछले वर्ष एनजीएसएल को संचालन और रखरखाव की अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। इसमें मशीनों की नियमित निगरानी, तकनीकी खामियों की समय पर पहचान और सुधार, सुरक्षा मानकों का पालन तथा कर्मचारियों और उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल था।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, औद्योगिक सुरक्षा विभाग के सहायक संचालक अश्विनी पटेल ने बताया कि सिंघीतराई प्लांट में ऑपरेशन और मेंटेनेंस का कार्य एनजीएसएल द्वारा किया जा रहा था। वहीं वेदांता कंपनी के पीआरओ दीपक विश्वकर्मा ने भी पुष्टि की कि बॉयलर यूनिट-1 की जिम्मेदारी एनजीएसएल के पास थी।

जांच की दिशा बदली, जवाबदेही तय होना बाकी

हादसे के बाद अब जांच की दिशा स्पष्ट रूप से ऑपरेशन और मेंटेनेंस से जुड़ी लापरवाही की ओर मुड़ गई है। प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि क्या तकनीकी चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया, या सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं हुआ।

फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में यह तय होगा कि इस भीषण हादसे के लिए जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की जाती है। प्रबंधन, ऑपरेशन टीम या मेंटेनेंस एजेंसी।

अब तक 23 श्रमिकों की मौत, बाकी का इलाज जारी

गौरतलब है कि वेदांता प्लांट मे हुए हादसे मे अब तक 23 लोगों की मौत हो चुकी है। बाकी अन्य घायलों का इलाज विभिन्न अस्पतालों मे जारी है।

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