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सक्ती में जेंडर समानता की दिशा में अहम कदम: नई चेतना 4.0 के अंतर्गत जेंडर रिसोर्स सेंटर का उद्घाटन, महिला सशक्तिकरण और घरेलू हिंसा रोकथाम पर रहेगा विशेष फोकस

सक्ती जिले मे भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा संचालित जेंडर समानता हेतु राष्ट्रीय अभियान “जेंडर कैंपेन – नई चेतना 4.0” के तहत संगवारी जेंडर रिसोर्स सेंटर का उद्घाटन किया गया। इस केंद्र का शुभारंभ जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी वाशु जैन के करकमलों से हुआ। कार्यक्रम का आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा किया गया।

उद्घाटन अवसर पर जिला सीईओ वाशु जैन ने कहा कि जेंडर असमानता समाज की एक गंभीर समस्या है, जिसके समाधान के लिए शासन-प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि जेंडर रिसोर्स सेंटर के माध्यम से जेंडर से जुड़ी किसी भी प्रकार की शिकायत या समस्या का निराकरण परामर्श के जरिए किया जाएगा। यहां एक समन्वित टीम कार्य करेगी, जिसमें जनपद पंचायत सीईओ, पुलिस अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी, ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधि तथा जेंडर विशेषज्ञ शामिल रहेंगे।

कार्यक्रम में जेंडर असमानता के दुष्प्रभावों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। महिला एवं बाल विकास विभाग के जेंडर विशेषज्ञों ने बताया कि घरेलू हिंसा जेंडर असमानता का एक प्रमुख परिणाम है, जिसे सामाजिक जागरूकता और संस्थागत सहयोग से कम किया जा सकता है। विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए जेंडर समानता की आवश्यकता और इसके सामाजिक लाभों पर प्रकाश डाला।

वक्ताओं ने इस तथ्य की ओर भी ध्यान दिलाया कि भारत ऐतिहासिक रूप से पुरुष प्रधान समाज रहा है, जिसके कारण वैश्विक स्तर पर जेंडर समानता के सूचकांकों में देश की स्थिति पीछे है। ऐसे में जेंडर रिसोर्स सेंटर जैसे प्रयास समाज में नई चेतना लाने और समानता की दिशा में ठोस कदम साबित होंगे।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में बंशीधर खांडे (उपाध्यक्ष, जनपद पंचायत सक्ती), सभापति टंकेश्वर पटेल, महंत, विभागीय अधिकारी डीएमएम राजीव श्रीवास, बीपीएम ज्ञानेंद्र राय उपस्थित रहे। महिला एवं बाल विकास विभाग से पर्यवेक्षक भावना नेताम, जेंडर विशेषज्ञ सतीश नेताम, सुशीला जोशी, वित्तीय साक्षरता एवं समन्वय विशेषज्ञ शशि गभेल सहित बड़ी संख्या में महिला समूहों की जेंडर सखी, पोषण सखी, FNHW एवं अन्य कैडर सदस्य भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

समापन पर यह संदेश दिया गया कि जेंडर समानता केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक भागीदारी से ही संभव है, और यह जेंडर रिसोर्स सेंटर इस दिशा में जिला सक्ती के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।

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