
सक्ती के बहुचर्चित अपहरण, दुष्कर्म और हत्या का मामला: कोर्ट ने आरोपी को सुनाई फांसी की सजा, कोर्ट ने कहा- नरमी समाज को देगा विपरीत संदेश, मामला ‘विरलतम से विरल’
सक्ती जिले के अत्यंत जघन्य, वीभत्स और बहुचर्चित अपहरण, दुष्कर्म एवं हत्या प्रकरण में न्यायालय ने ऐतिहासिक और कड़ा निर्णय सुनाया है। पीड़िता का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म करने और फिर नृशंस हत्या करने वाले आरोपी शंकर निषाद को न्यायालय ने भा.दं.सं. की धारा 376 एवं 302 के तहत मृत्युदण्ड, जबकि धारा 364 के तहत 10 वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक धारा में 1000-1000 रुपये के अर्थदण्ड से भी दंडित करने का आदेश दिया गया है। अर्थदण्ड की राशि अदा नहीं करने की स्थिति में आरोपी को प्रत्येक धारा में एक-एक माह का अतिरिक्त कठोर कारावास पृथक से भुगतने का आदेश भी न्यायालय द्वारा दिया गया है।
यह फैसला कु. सुनीता साहू, विशेष न्यायाधीश (एसटी/एससी), जांजगीर द्वारा सुनाया गया। न्यायालय ने अपने विस्तृत निर्णय में स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस प्रकरण में किसी भी प्रकार की नरमी बरतना समाज को विपरीत और घातक संदेश देगा। न्यायालय की राय में यह मामला “विरलतम से विरल” श्रेणी का है। मामला डभरा थाना क्षेत्र का है।
यह है पूरा मामला
विशेष लोक अभियोजक धीरज शुक्ला ने बताया कि पीड़िता बेमेतरा जिले में भृत्य के पद पर कार्यरत थी। वह दिनांक 9 अगस्त 2022 को छुट्टी लेकर अपने घर आई थी। इसके बाद 14 अगस्त 2022 की सुबह लगभग 9:00 बजे वह अपने घर से बेमेतरा जाने के लिए अपनी स्कूटी (एक्टिवा) में निकली थी।
सुबह लगभग 11:00 बजे के बाद पीड़िता का मोबाइल फोन स्विच ऑफ होना पाया गया। 14 अगस्त 2022 की रात तक जब वह बेमेतरा नहीं पहुंची, तब परिजनों को चिंता हुई। परिजनों की रिपोर्ट पर थाना डभरा में गुम इंसान दर्ज कर पीड़िता की पतासाजी प्रारंभ की गई।
कॉल डिटेल और सीसीटीवी फुटेज से मिली लोकेशन
जांच के दौरान पुलिस ने गुम इंसान के मोबाइल नंबर की डिटेल्स प्राप्त की। कॉल डिटेल रिकॉर्ड और लोकेशन के विश्लेषण से यह तथ्य सामने आया कि पीड़िता का मोबाइल नंबर सुबह 11 बजे के बाद स्विच ऑफ हुआ और उसकी अंतिम लोकेशन पलगड़ा घाटी की ओर पाई गई।
इसके बाद विवेचना के दौरान पलगड़ा घाट प्रवेश द्वार के सीसीटीवी वीडियो फुटेज चेक किए गए। फुटेज में दिनांक 14 अगस्त 2022 को समय 11:18 बजे पीड़िता एक लड़के के साथ स्कूटी पर पीछे बैठकर पलगड़ा घाटी की ओर जाती हुई दिखाई दी। वहीं उसी दिन 12:04 बजे वही लड़का स्कूटी में अकेले वापस आता हुआ सीसीटीवी में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
संदेही से पूछताछ मे हुआ अपराध का खुलासा
सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने शंकर निषाद को संदेही मानते हुए उससे पूछताछ की और उसका मेमोरेंडम कथन लिया गया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह पीड़िता से पहले से बातचीत करता था। उसने बाढ़ की वजह से कई स्थानों पर रास्ता बंद होने की बात कहकर नया रास्ता बताने के बहाने पीड़िता को धोखे में रखा।
आरोपी ने पीड़िता को भद्री चौक फगुरम बुलाया। वहां से आरोपी अपनी मोटरसाइकिल से और पीड़िता अपनी स्कूटी से दोनों खरसिया रेलवे स्टेशन पहुंचे। आरोपी ने अपनी मोटरसाइकिल खरसिया रेलवे स्टेशन में खड़ी कर दी और पीड़िता को उसी की स्कूटी में बैठाकर पलगड़ा जंगल की ओर ले गया।
दुष्कर्म के बाद हत्या की नृशंस वारदात
पलगड़ा घाट के जूनाडीह–साजापाली जंगल में आरोपी ने पीड़िता के हाथ स्कार्फ से बांध दिए और जबरन उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद आरोपी ने गला दबाकर तथा ब्लेड से पीड़िता की कलाईयों और गले की नसें काटकर उसकी निर्मम हत्या कर दी। हत्या के बाद आरोपी पीड़िता की स्कूटी से अकेले खरसिया रेलवे स्टेशन आया, वहां स्कूटी को खड़ी किया और फिर अपनी मोटरसाइकिल से अपने घर ग्राम सुखदा वापस चला गया।
प्रकरण में दिनांक 16 अगस्त 2022 को पुलिस द्वारा धारा 174 जा.फौ. के तहत कार्रवाई करते हुए भा.दं.सं. की धारा 364, 376, 302 एवं 201 कायम की गई। विवेचना के दौरान आरोपी शंकर निषाद के मेमोरेंडम कथन के आधार पर पीड़िता का शव बरामद किया गया। विवेचना पूर्ण कर अभियोग पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष तर्क रखा कि आरोपी द्वारा पीड़िता के साथ दुष्कर्म के बाद जिस प्रकार से उसकी हत्या की गई, वह न केवल अमानवीय बल्कि अत्यंत वीभत्स और पाश्विक है। अपराध की गंभीरता, निष्ठुरता और जघन्यता को देखते हुए अभियोजन ने इसे विरलतम से विरल मामला मानते हुए आरोपी को मृत्युदण्ड दिए जाने का निवेदन किया।
न्यायालय की सख्त टिप्पणी
न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि इस मामले में किसी भी प्रकार की नरमी बरतना समाज को विपरीत संदेश देगा। अभियुक्त का कृत्य कायरतापूर्ण, वीभत्स, पैशाचिक और आपराधिक है। न्यायालय ने माना कि आरोपी द्वारा असहाय पीड़िता के साथ किया गया दुष्कर्म और हत्या बिना किसी उकसावे के, पूरी निष्ठुरता के साथ की गई है। आरोपी में सुधार और पुनर्वास की कोई संभावना नहीं है और आजीवन कारावास इस अपराध के लिए अपर्याप्त होगा।
यह फैसला न्याय व्यवस्था की दृढ़ता को दर्शाता है और समाज को यह स्पष्ट संदेश देता है कि महिलाओं के विरुद्ध जघन्य अपराध करने वालों को कानून किसी भी कीमत पर बख्शेगा नहीं।