
सक्ती में पुलिस पेट्रोलिंग वाहन मे तोड़फोड़ का मामला: पुलिस-परिजनों के आरोपों में टकराव, पांच युवक गिरफ्तार, अवैध वसूली व मारपीट के आरोपों से घिरी पुलिस कार्रवाई, एक माह बाद भी जांच नहीं, SDOP ने कहा- जांच जारी
सक्ती जिले के जैजैपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कारीभांवर में होलिका दहन की रात पुलिस पेट्रोलिंग वाहन में तोड़फोड़ का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। एक ओर जहां पुलिस ने इस मामले में पांच युवकों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, वहीं दूसरी ओर परिजनों ने पुलिस पर अवैध वसूली, मारपीट और झूठे केस में फंसाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। घटना के एक माह बाद भी किसी प्रकार की विभागीय जांच नहीं होने से मामला आम जनता के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। वही एसडीओपी ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है, जांच के बाद उचित कार्यवाही की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, घटना 2 मार्च की रात लगभग 10-11 बजे की बताई जा रही है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस को अवैध शराब निर्माण की सूचना मिलने पर जैजैपुर थाने से 7-8 पुलिसकर्मी बिना वर्दी के गांव पहुंचे थे और कथित रूप से नशे की हालत में थे। उन्होंने अपनी गाड़ी गांव से करीब एक किलोमीटर दूर मरघटिया के पास खड़ी की और खेत के रास्ते कमलेश खैरवार के घर पहुंचे। आरोप है कि पुलिस ने अवैध शराब मिलने पर प्रकरण बनाने की धमकी देकर करीब 8 हजार रुपए लेकर उसे छोड़ दिया।
परिजनों के अनुसार, इसके बाद पुलिसकर्मी जब वाहन के पास लौटे तो वाहन में तोड़फोड़ मिली। इसी दौरान गांव के युवक जितेंद्र खैरवार और मुकेश खैरवार को संदिग्ध मानते हुए पकड़ लिया गया और कथित रूप से मारपीट करते हुए थाने ले जाया गया। आरोप है कि थाने में भी उनके साथ मारपीट की गई और बाद में रात 1 बजे उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिजनों का कहना है कि थाना प्रभारी ने उन्हें शिकायत न करने की सलाह देकर वापस भेज दिया।

आरोप है कि 3 मार्च को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी घटनास्थल पहुंचे लेकिन ग्रामीणों से कोई पूछताछ नहीं की गई। बाद में 18 मार्च को जितेंद्र खैरवार और प्रदीप खैरवार को न्यायालय से तथा मुकेश, अजय और नंदकुमार खैरवार को गांव से गिरफ्तार किया गया। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने खुद प्रार्थी बनकर सभी के खिलाफ अपराध क्रमांक 69/26 के तहत डकैती सहित गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर जेल भेज दिया।

वहीं पुलिस का दावा है कि 2 मार्च को पेट्रोलिंग के दौरान ग्राम कारीभांवर में कुछ युवक शराब के नशे में हंगामा कर रहे थे। पुलिस द्वारा समझाइश देने पर युवक उग्र हो गए और लाठी, डंडा व टांगी से शासकीय वाहन में तोड़फोड़ कर दी। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी दी, साथ ही एक आरक्षक की वर्दी फाड़कर 4 हजार रुपए भी लूट लिए। घटना में पुलिसकर्मी घायल भी हुए और वाहन सहित वायरलेस सेट को नुकसान पहुंचा, जिसकी कीमत लगभग 90 हजार रुपए बताई गई है।

पुलिस ने इस मामले में धारा 191(3), 296, 115(2), 351(3), 121(2), 132, 221, 310(2), 324(3) बीएनएस एवं लोक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से कथित रूप से लूटी गई राशि के हिस्से भी बरामद करने का दावा किया है।
इस पूरे घटनाक्रम में कई सवाल भी उठ रहे हैं। जैसे जप्त रकम की टाइमिंग, एमएलसी रिपोर्ट में अंतर, मौके पर गिरफ्तारी नहीं होना और बाद में गिरफ्तारी की प्रक्रिया को लेकर संदेह जताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक पुलिसकर्मियों की एमएलसी घटना के दो दिन बाद कराई गई, जबकि युवकों की उसी दिन हुई थी।

मामले ने जातिगत रंग भी ले लिया है। परिजनों का कहना है कि सभी युवक खैरवार (गोंड) जनजाति से हैं और उनके साथ जातिगत गाली-गलौज की गई। उन्होंने एसपी, आईजी, डीजीपी और छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति आयोग से शिकायत कर दोषी पुलिसकर्मियों पर एससी/एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई और युवकों की रिहाई की मांग की है।
कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर साधा निशाना
इधर, कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरा है। युवा कांग्रेस के जिला सचिव मोहन साहू ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि “आदिवासी मुख्यमंत्री के शासन में ही आदिवासी समाज के लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने निर्दोष युवकों को रिहा करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी परिवार के साथ खड़ा है।”

इस संबंध मे एसडीओपी भुनेश्वरी पैंकरा ने कहा कि ग्रामीणों द्वारा शिकायत की गई है। मामले की जांच की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी।