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SaktiBilaspur

वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल पर अवमानना याचिका: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी का आरोप; राजस्व सचिव, सक्ती कलेक्टर और डभरा एसडीएम भी पक्षकार

सिंघीतराई पावर प्लांट के भू-विस्थापितों को पुनर्वास लाभ नहीं मिलने का मामला, 13 वर्षों से नौकरी और भत्ते की मांग जारी

सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट से जुड़े भू-विस्थापितों के पुनर्वास एवं भत्ता भुगतान के मामले ने एक बार फिर कानूनी मोड़ ले लिया है। भू-विस्थापित परिवारों ने वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के खिलाफ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अवमानना (Contempt of Court) याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद भू-विस्थापितों को नियमानुसार लाभ नहीं दिया गया। मामले में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी, सक्ती कलेक्टर अमृत विकास टोपनो और डभरा एसडीएम विनय कश्यप को भी पक्षकार बनाया गया है।

2008 में हुआ था भूमि अधिग्रहण

जानकारी के अनुसार, सिंघीतराई में स्थापित पावर प्लांट के लिए वर्ष 2008 में आसपास के गांवों की लगभग 1 हजार एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था। इस अधिग्रहण से 800 से अधिक परिवार प्रभावित हुए थे। उस समय लागू पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति-2007 के तहत प्रभावित परिवारों को नौकरी अथवा नियमानुसार भत्ता देने का प्रावधान था। भू-विस्थापितों का आरोप है कि उन्हें इन लाभों से अब तक वंचित रखा गया है।

एथेना से वेदांता तक का सफर

यह पावर प्लांट प्रारंभ में एथेना पावर प्लांट के नाम से स्थापित हुआ था। वर्ष 2013 में इसका संचालन शुरू हुआ, लेकिन वित्तीय संकट के कारण वर्ष 2016 में प्लांट बंद हो गया। इसके बाद वर्ष 2022 में वेदांता ग्रुप ने इस प्लांट का अधिग्रहण किया और वर्ष 2025 में दोबारा संचालन शुरू किया। भू-विस्थापितों का कहना है कि प्लांट दोबारा चालू होने के बाद भी 400 से अधिक परिवारों को न तो रोजगार दिया गया और न ही उन्हें नियमानुसार भत्ता उपलब्ध कराया गया।

2021 में मामला पहुंचा था हाईकोर्ट

भू-विस्थापित परिवारों की ओर से वर्ष 2021 में 37 परिवारों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका पर सुनवाई के बाद करीब दो वर्ष पश्चात हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन और राज्य शासन को मामले का समाधान करने तथा पात्र भू-विस्थापितों को नियमानुसार लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।

प्रशासन ने जारी किए थे निर्देश

हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिला प्रशासन द्वारा गठित समिति ने वेदांता पावर प्लांट प्रबंधन को पत्र जारी कर भू-विस्थापितों को नियमानुसार भत्ता देने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी कथित रूप से आदेश का पालन नहीं किया गया। बताया जा रहा है कि करीब दो माह पूर्व सक्ती कलेक्टर ने भी प्लांट प्रबंधन को हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने और पात्र भू-विस्थापितों को भत्ता भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। भू-विस्थापितों का आरोप है कि इन निर्देशों के बावजूद प्लांट प्रबंधन ने कोई कार्रवाई नहीं की।

अवमानना याचिका दायर

लगातार आदेशों के पालन नहीं होने से नाराज भू-विस्थापित परिवारों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है। याचिका में वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के साथ-साथ राजस्व एवं आपदा प्रबंधन सचिव शम्मी आबिदी, सक्ती कलेक्टर अमृत विकास टोपनो और डभरा एसडीएम विनय कश्यप को भी पक्षकार बनाया गया है। याचिका में हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना किए जाने का आरोप लगाया गया है।

कलेक्टर ने क्या कहा?

पूरे मामले पर सक्ती कलेक्टर अमृत विकास टोपनो ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिला प्रशासन की ओर से प्लांट प्रबंधन को भू-विस्थापितों को नियमानुसार भत्ता भुगतान करने के लिए पत्र जारी किए गए हैं। प्रशासन मामले के समाधान और न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन के लिए आवश्यक प्रयास कर रहा है।

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