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US-Iran Talks Pakistan Visit: अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस पाकिस्तान रवाना, ईरान की भागीदारी पर सस्पेंस

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पाकिस्तान के दौरे पर रवाना हो गए हैं, जहां दोनों देशों के बीच संभावित वार्ता को लेकर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। हालांकि, इस बातचीत में ईरान शामिल होगा या नहीं, इस पर अब भी अनिश्चितता बनी हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेंस पहले भी अप्रैल के मध्य में ईरान के साथ हुई लंबी बातचीत में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर चुके हैं, लेकिन उस दौर में कोई ठोस समझौता नहीं हो सका था। दोनों देशों के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर गहरे मतभेद बने हुए हैं।

हालिया घटनाक्रम में अमेरिका द्वारा चीन की ओर से आ रहे ईरानी जहाज ‘टूस्का’ को कब्जे में लेने के बाद तनाव और बढ़ गया है। ईरान ने इस कार्रवाई को “समुद्री डकैती” करार देते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है और जवाबी कदम उठाने की चेतावनी भी दी है।

टूस्का को कब्जे में लेने से पहले का VIDEO

इसी बीच, पाकिस्तान में प्रस्तावित दूसरे दौर की बातचीत को लेकर संशय गहराया हुआ है। ईरान ने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को सीजफायर समझौते का उल्लंघन बताया है और अमेरिका की आक्रामक भाषा को बातचीत में बाधा बताया है। ऐसे में वार्ता की संभावना कमजोर नजर आ रही है, हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में संकेत मिले हैं कि बातचीत कई दिनों तक चल सकती है और अस्थायी समझौते (MoU) की कोशिश की जा सकती है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौजूदा हालात में ईरान के पास सीमित विकल्प हैं। कतर के एक विश्लेषक के अनुसार, ईरान या तो टकराव का रास्ता अपनाएगा या फिर बातचीत का, और संभावना है कि वह अपने हितों के अनुरूप शर्तों के साथ वार्ता में शामिल हो सकता है।

बीते 24 घंटों में क्षेत्रीय हालात और अधिक संवेदनशील हो गए हैं। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव बढ़ा है, तेल की कीमतों में उछाल दर्ज किया गया है और कई देशों की समुद्री गतिविधियों पर असर पड़ा है। भारत ने भी अपने जहाजों पर फायरिंग की घटना को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि शांति समझौते के लिए यह “आखिरी मौका” है। कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया में स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है और आगामी दिनों में कूटनीतिक घटनाक्रम पर वैश्विक नजरें टिकी रहेंगी।

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