RaipurSurajpur

सूरजपुर खदान में पत्रकारों से मारपीट, 3 घंटे बंधक बनाने का आरोप: छत्तीसगढ़ सक्रिय पत्रकार संघ ने घटना को बताया लोकतंत्र पर हमला, नक्सल मुक्त दावों के बीच पत्रकारों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

सूरजपुर जिले में प्रकाश इंडस्ट्रीज लिमिटेड की भास्कर पारा कोयला खदान में पत्रकारों के साथ कथित मारपीट, लूटपाट और बंधक बनाने की घटना सामने आई है। छत्तीसगढ़ सक्रिय पत्रकार संघ ने इसे गंभीर, चिंताजनक और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला बताया है।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष राज गोस्वामी के अनुसार 19 अप्रैल 2026 को पत्रकार चंद्र प्रकाश साहू, लोकेश गोस्वामी और मनीष जायसवाल खदान क्षेत्र के पास सार्वजनिक स्थान से रिपोर्टिंग कर रहे थे। इस दौरान वहां मौजूद सुरक्षा कर्मियों और कर्मचारियों ने उन्हें रोककर विवाद किया, मारपीट की, कैमरे और मोबाइल छीन लिए तथा रिकॉर्ड किए गए वीडियो जबरन डिलीट कराए। आरोप है कि पत्रकारों को करीब तीन घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया और इस दौरान गाली-गलौज व धमकी भी दी गई।

राज गोस्वामी ने कहा कि घटना के चार दिन बाद भी पुलिस द्वारा ठोस कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे यह संदेश जाता है कि प्रभावशाली लोगों के सामने कानून कमजोर पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि एक ओर सरकार प्रदेश को नक्सल मुक्त बताने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर पत्रकारों की सुरक्षा खतरे में है।

उन्होंने कहा कि यदि पत्रकारों को डराकर चुप कराने की कोशिश की जाएगी, तो आम जनता की आवाज दब जाएगी और सच्चाई सामने नहीं आ पाएगी। उन्होंने बस्तर के पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं पत्रकारों में भय का माहौल पैदा कर रही हैं।

संघ ने प्रशासन से मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच और पीड़ित पत्रकारों को सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

अंत में संघ ने कहा कि आंचलिक पत्रकार ही पत्रकारिता की मजबूत नींव हैं और उन्हें कमजोर करना लोकतंत्र को कमजोर करने के समान है।

Related Articles

Back to top button