
सुरेन्द्र तिवारी की ‘सफ़हात का ज़ायक़ा’ अधिवक्ता संघ पुस्तकालय को भेंट: न्यायिक अनुभवों पर आधारित कृति बनी विधि जगत के लिए प्रेरणास्रोत, चितरंजय पटेल ने कहा- जूनियर अधिवक्ताओं के लिए मार्गदर्शक हैं तिवारी
सक्ती जिले मे सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश सुरेन्द्र तिवारी की चर्चित कृति ‘सफ़हात का ज़ायक़ा’ को अधिवक्ता संघ सक्ती के पुस्तकालय के लिए भेंट किया गया। उच्च न्यायालय अधिवक्ता एवं राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय आयोग (विधि) के प्रतिनिधि चितरंजय पटेल ने यह पुस्तक ग्रंथालय सचिव मुरली देवांगन को सौंपते हुए इसे न्यायिक अनुभवों और जीवन बोध का महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया।
चितरंजय पटेल ने कहा कि यह कृति न्यायिक जीवन के विविध अनुभवों, समझ और व्यावहारिक ज्ञान को सरल एवं प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करती है, जो विधि क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि अपने प्रारंभिक वकालत काल में सक्ती में पदस्थ रहे सुरेन्द्र तिवारी जूनियर अधिवक्ताओं के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि तिवारी ने अपने सहज, सरल और व्यावहारिक मार्गदर्शन से कई युवा अधिवक्ताओं को सफल वकालत की दिशा दिखाई। यह पुस्तक न केवल विधि के विद्यार्थियों और अधिवक्ताओं के लिए उपयोगी है, बल्कि न्यायिक सेवा से जुड़े लोगों को भी नई दृष्टि प्रदान करती है।
अधिवक्ता संघ सक्ती ने इस महत्वपूर्ण कृति के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पुस्तकालय में इसके शामिल होने से अधिवक्ताओं और विधि के छात्रों को अध्ययन एवं मार्गदर्शन में सहायता मिलेगी।