
सक्ती में कोटवारी भूमि फर्जीवाड़े का मामला: शासकीय दस्तावेजों में गलत जानकारी देकर 11.61 एकड़ भूमि अपने नाम कराने का आरोप, धोखाधड़ी का केस दर्ज
सक्ती जिले में कोटवारी भूमि के नामांतरण और उत्तराधिकार से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में पुलिस ने जांच के बाद आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का अपराध दर्ज किया है। शिकायत जांच के दौरान आवेदिका, गवाहों के बयान और तहसील कार्यालय से प्राप्त अभिलेखों के आधार पर प्रथम दृष्टया शासकीय दस्तावेजों में गलत जानकारी प्रस्तुत कर शासन को धोखा देने के साक्ष्य मिलने पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी है। मामला सक्ती थाना क्षेत्र का है।
जानकारी के अनुसार, देवरी निवासी बुधकुंवर ने 27 दिसंबर 2025 को पुलिस अधीक्षक सक्ती को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया था कि बुधारूदास ने कोटवारी भूमि अपने नाम कराने और कोटवार पद का लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से राजस्व अभिलेखों में गलत जानकारी प्रस्तुत की। शिकायत में कहा गया कि आरोपी ने स्वयं को साधुदास का उत्तराधिकारी दर्शाते हुए तहसीलदार के समक्ष भूमि स्वामी हक प्रदान करने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया और कथित रूप से शासकीय अभिलेखों में गलत तथ्य दर्ज कराए।
जांच के दौरान पुलिस ने आवेदिका और अन्य गवाहों के कथन दर्ज किए और तहसील कार्यालय से संबंधित दस्तावेज प्राप्त कर उनका परीक्षण किया। जांच में माननीय उच्च न्यायालय, बिलासपुर द्वारा रिट याचिका क्रमांक 2632 एवं 2064 में पारित आदेशों सहित उपलब्ध अभिलेखों का भी अवलोकन किया गया।
शिकायत के अनुसार, आरोपी मूल रूप से ग्राम जामपाली का निवासी है, जबकि उसने अपने जीजा साधुदास को पिता बताते हुए स्वयं को ग्राम देवरी का निवासी और उत्तराधिकारी दर्शाया। आरोप है कि इसी आधार पर राजस्व न्यायालय से आदेश प्राप्त कर लगभग 11.61 एकड़ कोटवारी सेवा भूमि अपने नाम दर्ज करा ली और लंबे समय तक कोटवार पद एवं उससे मिलने वाले लाभ प्राप्त करता रहा।
पुलिस का कहना है कि जांच में प्रथम दृष्टया यह तथ्य सामने आए कि आरोपी द्वारा भूमि नामांतरण एवं उत्तराधिकार के संबंध में गलत जानकारी प्रस्तुत कर शासन के साथ छल किया गया। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध धारा 420 भादवि के तहत अपराध दर्ज कर मामले की विवेचना की जा रही है।
पुलिस ने बताया कि विवेचना के दौरान राजस्व अभिलेख, न्यायालयीन आदेश एवं अन्य दस्तावेजों की विस्तृत जांच की जाएगी। जांच के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।