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पिथौरा में नीलगाय के अवैध शिकार का खुलासा: दो हिरासत में, 6 अन्य की तलाश, धारदार हथियार से की गई हत्या, पैर काटे जाने के मिले सबूत, वन विभाग सख्त, आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी

महासमुंद जिले के पिथौरा वन परिक्षेत्र अंतर्गत सुखीपाली के शांतिनगर में मादा नीलगाय के अवैध शिकार का गंभीर मामला सामने आया है। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मृत अवस्था में वन्यप्राणी मिलने के बाद पूरे मामले में जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल दो संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, जबकि छह अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह करीब 8:30 बजे मुखबिर की सूचना पर वन विभाग की टीम कक्ष क्रमांक 234, शांतिनगर (सुखीपाली) पहुंची, जहां एक वयस्क मादा नीलगाय मृत पाई गई। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि नीलगाय का शिकार अवैध रूप से किया गया है। घटनास्थल पर नीलगाय के दो पैर काटे हुए मिले और गले पर धारदार हथियार से हमला किए जाने के स्पष्ट निशान पाए गए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉग स्क्वॉड, जंगल सफारी रायपुर की टीम और पशु चिकित्सक सांकरा को मौके पर बुलाया गया। विशेषज्ञों की प्रारंभिक जांच में पुष्टि हुई कि नीलगाय की मौत धारदार हथियार से हमला करने के कारण हुई है।

वन विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए शांतिनगर निवासी जोहित बंदे (30 वर्ष) और सुरेंद्र बंदे (32 वर्ष) को हिरासत में लिया है। पूछताछ के दौरान छह अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आई है, जिनकी तलाश तेज कर दी गई है।

इस मामले में भारतीय वन अधिनियम 1927 की विभिन्न धाराओं के तहत पी.ओ.आर. क्रमांक 20684/14, दिनांक 04 मई 2026 दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है। पशु चिकित्सकों द्वारा पोस्टमार्टम के बाद नीलगाय के शव का नियमानुसार अंतिम संस्कार किया गया।

पूरी कार्रवाई वनमंडलाधिकारी मयंक पाण्डेय के निर्देशन एवं संयुक्त वनमंडलाधिकारी डीपी बैस के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। मौके पर परिक्षेत्र अधिकारी सुखराम निराला, वन अमला, स्थानीय जनप्रतिनिधि, सरपंच और पत्रकार भी उपस्थित रहे।

वन विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वन्यजीवों के अवैध शिकार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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