
रानीतराई हत्याकांड में कोर्ट का बड़ा फैसला: सास को उम्रकैद, पत्नी को 7 साल की सजा, मासूम बेटियों की गवाही बनी केस का अहम आधार
दुर्ग जिले के रानीतराई थाना क्षेत्र के बहुचर्चित हत्याकांड में अपर सत्र न्यायाधीश पाटन दुलार सिंह निर्मलकर की अदालत ने सोमवार को अहम फैसला सुनाते हुए सास भारती वर्मा को हत्या के अपराध में आजीवन कारावास और मृतक की पत्नी अनिता देशमुख को साक्ष्य छिपाने के मामले में 7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट किया कि पारिवारिक रिश्तों में भी जघन्य अपराध किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं।
सत्र प्रकरण क्रमांक 04/2025 में दिए गए इस निर्णय में न्यायालय ने पाया कि 29 अगस्त 2024 को ग्राम दरबार मोखली में बंद घर से दुर्गंध आने पर ग्रामीणों द्वारा ताला तोड़ने पर टिकेश्वर देशमुख (30) का सड़ा-गला शव बरामद हुआ था। जांच में सामने आया कि जन्माष्टमी के दिन हुए विवाद के बाद सास भारती वर्मा ने गुस्से में रात के समय सो रहे दामाद के सिर पर गैती से कई वार कर उसकी हत्या कर दी।

घटना के दौरान मौजूद पत्नी अनिता देशमुख ने पति को बचाने के बजाय अपनी मां का साथ दिया और दोनों ने मिलकर शव को घर के पास एक खंडहरनुमा कमरे में छिपा दिया। अगले दिन दोनों घर में ताला लगाकर इलाज का बहाना बनाते हुए दुर्ग चले गए, ताकि किसी को संदेह न हो। बाद में मामले का खुलासा होने पर पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया।
अदालत में पेश साक्ष्यों, गवाहों और परिस्थितिजन्य प्रमाणों के आधार पर यह सिद्ध हुआ कि सास ने जानलेवा हमला कर हत्या की, जबकि पत्नी ने साक्ष्य मिटाने में सक्रिय भूमिका निभाई। अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक शेखर वर्मा ने प्रभावी पैरवी की।
अदालत ने भारती वर्मा को धारा 103 के तहत आजीवन कारावास व 1000 रुपये जुर्माना तथा धारा 238(3)(5) के तहत 7 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई। वहीं अनिता देशमुख को धारा 238(3)(5) के तहत 7 वर्ष सश्रम कारावास और 1000 रुपये जुर्माने से दंडित किया गया। जुर्माना अदा नहीं करने पर अतिरिक्त 5 माह की सजा का प्रावधान रखा गया है।
मामले मे सबसे संवेदनशील पहलू यह रहा कि घटना के समय घर में मौजूद मृतक की दो मासूम बेटियां इस जघन्य वारदात की चश्मदीद गवाह बनीं, जिनकी गवाही भी फैसले में महत्वपूर्ण रही।