
भारत-माला प्रोजेक्ट घोटाला उजागर: छत्तीसगढ़ में ED की 9 ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई, रायपुर-महासमुंद में भू-माफिया और अफसरों पर शिकंजा
भारत-माला परियोजना में सामने आए करोड़ों के भूमि अधिग्रहण घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छत्तीसगढ़ में बड़ी कार्रवाई की है। शुक्रवार सुबह से ED की टीम ने राज्य के 9 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की। राजधानी रायपुर में हरमीत सिंह खनूजा के निवास पर और महासमुंद के मेघ बसंत इलाके में कारोबारी जसबीर सिंह बग्गा के घर पर सुबह करीब 6 बजे से तलाशी जारी है। कार्रवाई के दौरान संबंधित परिसरों के बाहर सुरक्षा बल तैनात हैं और किसी को भी भीतर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
यह कार्रवाई भारत-माला परियोजना के तहत रायपुर‑विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण में मुआवजा भुगतान से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच के तहत की जा रही है। ED को संदेह है कि जमीन अधिग्रहण के दौरान मुआवजे की राशि तय करने और भुगतान करने में बड़े स्तर पर गड़बड़ियां की गईं। जांच के दायरे में निजी व्यक्तियों के साथ-साथ उनके सहयोगी, कुछ सरकारी अधिकारी और जमीन मालिक भी शामिल हैं।

जानकारी के अनुसार, हरमीत सिंह खनूजा इस घोटाले में नामजद भूमि दलाल/एजेंट हैं। आरोप है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेज, नकली बंटवारे और म्यूटेशन के जरिए मुआवजा राशि को गलत तरीके से हासिल करने और उसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने में भूमिका निभाई। इससे पहले 25 अप्रैल 2025 को आर्थिक अपराध शाखा (EOW) भी उनके खिलाफ छापेमारी और गिरफ्तारी की कार्रवाई कर चुकी है।

जांच में सामने आया है कि भारत-माला प्रोजेक्ट के तहत जमीन को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर वास्तविक से कई गुना ज्यादा मुआवजा दिखाया गया। लगभग 29.5 करोड़ की जमीन को कागजों में 70 करोड़ से अधिक का दर्शाया गया और कुल मिलाकर करीब 43 करोड़ रुपए के घोटाले को अंजाम दिया गया। इस मामले में पहले ही कोरबा के डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे और जगदलपुर निगम कमिश्नर निर्भय साहू को निलंबित किया जा चुका है।

भारत-माला परियोजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी सड़क योजना है, जिसके तहत देशभर में करीब 26 हजार किलोमीटर लंबे आर्थिक कॉरिडोर विकसित किए जाने हैं। रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर इसी योजना का अहम हिस्सा है। ED की मौजूदा कार्रवाई से घोटाले में शामिल अन्य लोगों पर भी शिकंजा कसने की संभावना जताई जा रही है।
