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Janjgir-Champa

कड़ारी धान खरीदी केंद्र में फर्जी नियुक्ति का आरोप: दैनिक मजदूर को प्रभारी बनाने से किसानों में आक्रोश, पुराने आरोपों वाले कर्मचारियों की वापसी पर सवाल

जांजगीर चांपा जिले के कड़ारी स्थित धान खरीदी केंद्र एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में आ गया है। वर्ष 2025-26 की खरीदी शुरुआत के साथ ही केंद्र संचालन को लेकर उठे सवालों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। ग्रामीणों और किसानों का आरोप है कि केंद्र के लिए कोई वैधानिक और योग्य प्रभारी नियुक्त न होने के कारण दैनिक मजदूरी करने वाले एक व्यक्ति को ही अस्थायी प्रभारी बनाकर धान खरीदी शुरू करा दी गई, जिसे वे “फर्जी व असंगत नियुक्ति” करार दे रहे हैं।

किसानों का कहना है कि करोड़ों रुपये की धान खरीदी वाले केंद्र में इस तरह की नियुक्ति न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि इससे पूरी प्रक्रिया की जवाबदेही भी संदिग्ध हो जाती है। बीते वर्षों में हुई कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए ग्रामीणों ने आशंका जताई कि इस बार भी वही हालात दोहराए जा सकते हैं। उनका आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी और सेवा सहकारी समिति प्रबंधन पारदर्शी व्यवस्था स्थापित करने में विफल रहे हैं।

विवाद यहीं तक सीमित नहीं है। किसानों के अनुसार उसी कंप्यूटर ऑपरेटर को दोबारा जिम्मेदारी सौंप दी गई है, जिस पर पूर्व में फर्जी जमीन चढ़ाने सहित गंभीर अनियमितताओं के आरोप लग चुके हैं। इस संबंध में दस्तावेजी शिकायतें भी पहले से उपलब्ध बताई जा रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन “जांच प्रक्रिया” के नाम पर समय गुजार रहा है और दागी कर्मचारियों को फिर से अवसर देकर संभावित भ्रष्टाचार का रास्ता साफ किया जा रहा है।

मामला उस समय और संवेदनशील हो गया जब विवादित अस्थायी प्रभारी का कथित बयान सामने आया कि “जिसे जो छापना है छाप दो, एक साल खरीदी करना है, उसके बाद मुझे पता है क्या करना है।” ग्रामीणों का कहना है कि यह बयान जिम्मेदारी के अभाव, नियमों के प्रति उदासीनता और संभावित मनमानी को दर्शाता है।

किसानों की मांग है कि फर्जी व अस्थायी नियुक्ति को तत्काल रद्द कर केंद्र में नियमों के अनुसार वैधानिक प्रभारी की नियुक्ति की जाए। साथ ही जिन कर्मचारियों पर पूर्व में आरोप लगे हैं, उनके खिलाफ स्पष्ट और समयबद्ध कार्रवाई हो ताकि धान खरीदी प्रक्रिया निष्पक्ष और किसान हितैषी बनी रहे।

अब सबकी निगाहें प्रशासनिक कदमों पर टिकी हैं कि क्या समय रहते ठोस कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी “जांच जारी है” कहकर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

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